गया: समय के साथ गया में सवारी वाहनों का स्वरूप भी बदलता गया। कभी टमटम और रिक्शा का दौर था, फिर ऑटो ने जगह बनाई और अब ई-रिक्शा यानी टोटो शहर से लेकर गांव तक यात्रियों की पहली पसंद बन गया है। कम खर्च और आसानी से घर तक पहुंचने की सुविधा के कारण इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है।
लेकिन गया में टोटो का बढ़ता चलन अब सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े कर रहा है। खासकर रात के समय बड़ी संख्या में ई-रिक्शा बिना हेडलाइट के सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चालक बैटरी की खपत कम करने और माइलेज बढ़ाने के लिए जानबूझकर लाइट बंद रखते हैं। इससे अंधेरे में तेज रफ्तार टोटो दूसरे वाहन चालकों और यात्रियों के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।
टोटो चालक जीतन कुमार के मुताबिक, पूरी तरह चार्ज बैटरी पर कंपनी करीब 120 किलोमीटर तक चलने का दावा करती है, जबकि सड़क पर औसतन करीब 100 किलोमीटर का माइलेज मिलता है। उनका कहना है कि हेडलाइट और हॉर्न का कम इस्तेमाल करने पर कुछ अतिरिक्त दूरी मिल सकती है। हालांकि वे खुद सुरक्षा के लिए रात में हेडलाइट जलाकर वाहन चलाते हैं।
गया शहर में करीब 1000 से 1500 और पूरे जिले में 5000 से अधिक ई-रिक्शा होने का दावा विक्रेता बबलू कुमार ने किया है। उन्होंने भी रात में बिना लाइट चलने की समस्या को खतरनाक बताया।
इसके अलावा नाबालिग चालकों की मनमानी और सड़कों पर अचानक ब्रेक लगाने जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। नागरिकों का कहना है कि नियमों की अनदेखी से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
मामला संज्ञान में आने के बाद विधि व्यवस्था डीएसपी सह ट्रैफिक डीएसपी प्रभारी ललित मोहन सिंह ने सख्त कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने ई-रिक्शा चालकों से अपील की कि वे रात में अनिवार्य रूप से हेडलाइट जलाकर ही वाहन चलाएं।






