कटिहार से शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। कोढ़ा प्रखंड की रौतारा पंचायत में छोटे-छोटे स्कूली बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि रौतारा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के लंबे समय तक खड़े रहने पर कुछ बच्चे ट्रेन के नीचे से निकलकर दूसरी तरफ जाने की कोशिश करते हैं। यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता देती नजर आती है।
दरअसल, रौतारा पंचायत की बड़ी आबादी रेलवे लाइन के पूर्वी हिस्से में रहती है, जबकि स्कूल और दूसरी जरूरी सुविधाएं रेलवे लाइन के दूसरी तरफ हैं। पंचायत के कुल 10 वार्डों में से 6 वार्ड पूर्वी क्षेत्र में हैं और स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 65 प्रतिशत आबादी इसी हिस्से में रहती है। इसके बावजूद यहां एक भी प्राथमिक विद्यालय नहीं है।
हालांकि रेलवे की ओर से फुट ओवर ब्रिज बनाया गया है, लेकिन उसकी कनेक्टिंग सड़क की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण ग्रामीणों को इसका इस्तेमाल करने में परेशानी होती है। वहीं रेलवे फाटक से होकर जाने वाला रास्ता काफी लंबा पड़ता है। ऐसे में समय बचाने के लिए बच्चे सीधे रेलवे ट्रैक पार करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक हमेशा चिंतित रहते हैं। ग्रामीणों ने पूर्वी क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय स्थापित करने की मांग की है, ताकि बच्चों को रोजाना रेलवे ट्रैक और हाईवे पार न करना पड़े।
मामले पर कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि फुट ओवर ब्रिज का इस्तेमाल कराने की कोशिश की जाएगी। साथ ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को जगह का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। विद्यालय के लिए उपयुक्त जगह मिलने पर प्रस्ताव विभाग को भेजा जाएगा। डीएम ने रेलवे अधिकारियों से बात कर स्कूल की छुट्टी के समय सुरक्षा व्यवस्था के लिए लोगों की तैनाती पर भी चर्चा करने की बात कही है।
अब सवाल यही है कि आखिर कब तक मासूम बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे? प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ स्कूल बनाने की नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने की भी है।





