ईरानी हमले में जान गंवाने वाले गोपालगंज के मरीन इंजीनियर को नम आंखों से अंतिम विदाई, गांव में पसरा मातम

गोपालगंज: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच मर्चेंट शिप पर हुए ईरानी हमले में जान गंवाने वाले गोपालगंज जिले के थावे प्रखंड के विदेशी टोला गांव निवासी मरीन इंजीनियर रोहन गुप्ता उर्फ सोनू गुप्ता का पार्थिव शरीर एक सप्ताह बाद दुबई से उनके पैतृक गांव पहुंचा। ताबूत में बंद बेटे का शव देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरा गांव गम में डूब गया। माता-पिता अपने लाडले बेटे से लिपटकर बेसुध हो गए, जबकि परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।

सोनू गुप्ता के अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग पहुंचे। हर कोई इस होनहार युवक को श्रद्धांजलि देने और अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ पड़ा। गांव की गलियां लोगों से भर गईं और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल छा गया।

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इसके बाद पूरे सम्मान के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। नम आंखों से ग्रामीण शवयात्रा में शामिल हुए। पार्थिव शरीर को पिपराही पुल स्थित श्मशान घाट ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट पर बड़े भाई आलोक कुमार ने छोटे भाई सोनू को मुखाग्नि दी। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।

परिवार ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वे बेटे के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार कर रहे थे। माता-पिता और भाई हर पल दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठे रहते थे। परिजनों ने कहा कि बेटे के खोने का दुख कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन सनातन परंपरा के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर पाने से उन्हें कुछ संतोष मिला है।

रोहन गुप्ता उर्फ सोनू, थावे प्रखंड के जूता-चप्पल एवं जनरल स्टोर व्यवसायी संजय प्रसाद गुप्ता के सबसे छोटे बेटे थे। वे दुबई की अल बयाह एडनौक कंपनी में शिप इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, 13 जुलाई को सऊदी अरब से लौट रहे मर्चेंट शिप पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास हुए ईरानी हमले में उनकी मौत हो गई थी। इस घटना ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गोपालगंज जिले को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में आज भी हर जुबान पर सिर्फ सोनू की मेहनत, सादगी और उज्ज्वल भविष्य की चर्चा है।

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