59 साल बाद मिला इंसाफ: दादा ने 1967 में दायर किया था मुकदमा, पोते सूबेदार यादव के पक्ष में आया ऐतिहासिक फैसला

औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने जिले के सबसे पुराने लंबित दीवानी मुकदमों में से एक का ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 59 साल बाद वादी पक्ष को न्याय दिया है। खखड़ा गांव निवासी सूबेदार यादव के पक्ष में आए इस फैसले के साथ तीन पीढ़ियों से चली आ रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया।

इस मुकदमे की शुरुआत 10 अगस्त 1967 को तत्कालीन गया जिला अदालत में सूबेदार यादव के दादा जगनारायण यादव ने की थी। उस समय औरंगाबाद गया जिले का हिस्सा था। बाद में जिला बनने पर मामला औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय स्थानांतरित कर दिया गया। यह मुकदमा वर्षों तक लंबित रहा और जिले का सबसे पुराना सिविल केस बन गया।

वादी पक्ष के अधिवक्ता रविकांत वर्मा के अनुसार, विवाद खाता नंबर 31, प्लॉट नंबर 1488 की तीन कट्ठा जमीन पर रैयती हक को लेकर था। जगनारायण यादव और मुंगेश्वर यादव दोनों खुद को रानी सैयदा खातून की जमींदारी सेटलमेंट का वास्तविक रैयत बता रहे थे। वादी पक्ष ने 25 जनवरी 1946 के पैमाने को साक्ष्य बनाया, जबकि प्रतिवादी पक्ष ने 21 अप्रैल 1945 के पैमाने के आधार पर अपना दावा पेश किया।

मामले में गवाही की प्रक्रिया 22 मई 1972 से शुरू हुई। सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से 12 और प्रतिवादी पक्ष की ओर से 6 गवाह पेश किए गए। मुकदमे के कानूनी बिंदु पांच बार तय किए गए और इस लंबे सफर में दोनों पक्षों के अधिकांश मूल पक्षकारों का निधन हो गया। वर्ष 1971 में विवादित जमीन का मूल्य 100 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये निर्धारित किया गया था।

सब जज अष्टम सह एसीजेएम-7 संदीप कुमार सिंह की अदालत ने स्वत्व वाद संख्या 96/67, 78/24 में सुनवाई पूरी कर सूबेदार यादव के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें रैयती हक प्रदान किया।

फैसले के बाद भावुक सूबेदार यादव ने कहा कि उनके दादा ने यह लड़ाई शुरू की थी और आज 59 साल बाद परिवार को न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर हमेशा भरोसा था कि देर से ही सही, लेकिन न्याय अवश्य मिलेगा।

वहीं प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र यादव ने बताया कि फैसले की प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन दिया गया है। आदेश की कॉपी मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। यह फैसला औरंगाबाद के न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

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