पटना में नई सैन्य कमान: मेजर जनरल जितेंद्र सिंह बने झारखंड-बिहार सब एरिया के 10वें जीओसी, बोले- राष्ट्र सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता

पटना: भारतीय सेना के लिए गर्व के क्षण में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित मेजर जनरल जितेंद्र सिंह ने 18 जुलाई 2026 को पटना के दानापुर स्थित झारखंड एवं बिहार सब एरिया के 10वें जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उनकी नियुक्ति को पूर्वी भारत के इस महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में क्षेत्र की सैन्य तैयारियों, प्रशासनिक दक्षता और पूर्व सैनिकों के कल्याण को नई दिशा मिलेगी।

मेजर जनरल जितेंद्र सिंह सैनिक स्कूल, रीवा और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। भारतीय सेना की कोर ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन प्राप्त करने के बाद उन्होंने करीब तीन दशक के लंबे सैन्य जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। ऑपरेशनल कमान, सामरिक योजना, क्षमता विकास और नेतृत्व के विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुभव ने उन्हें सेना के दूरदर्शी अधिकारियों की श्रेणी में स्थापित किया है।

उन्होंने एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के उप प्रबंध निदेशक के रूप में भी उल्लेखनीय सेवाएं दी हैं। इस दौरान पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलें की गईं, जिससे उन्हें इस क्षेत्र का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।

मेजर जनरल जितेंद्र सिंह अपनी सैन्य उपलब्धियों के साथ-साथ शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए भी जाने जाते हैं। संघर्ष प्रबंधन, संघर्ष समाधान और सामरिक नेतृत्व जैसे विषयों में उन्होंने विशेष अध्ययन किया है, जो उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावी बनाता है।

कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों, जवानों और असैन्य कर्मचारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेवा के प्रति पूर्ण समर्पण, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए टीम भावना, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ देश सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर जनरल जितेंद्र सिंह के अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व से झारखंड एवं बिहार सब एरिया की ऑपरेशनल क्षमता और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को भी नई गति और प्रभावी दिशा प्राप्त होगी।

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