कोसी में समाई करोड़ों की योजना! नारायणपुर में कटाव से बहा निर्माण, ग्रामीणों ने उठाए भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सवाल


बिहार की कोसी नदी एक बार फिर अपने साथ करोड़ों रुपये की सरकारी योजना भी बहा ले गई। सहरसा के नवहट्टा प्रखंड के नारायणपुर गांव में कटावरोधी निर्माण तेज धारा में समा गया है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोग सरकारी कार्यों की गुणवत्ता, समय पर सुरक्षा उपाय नहीं होने और संभावित भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहे हैं। अब ग्रामीण पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कोसी नदी को बिहार का “शोक” यूं ही नहीं कहा जाता। हर साल बाढ़ और कटाव की वजह से हजारों परिवार प्रभावित होते हैं। सहरसा जिले के नवहट्टा प्रखंड की सत्तौर पंचायत स्थित नारायणपुर गांव में भी इस बार कोसी का रौद्र रूप देखने को मिला। यहां करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई कटावरोधी योजना तेज कटाव के कारण नदी में समा गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस निर्माण से गांव और खेती की जमीन को सुरक्षित रखने का दावा किया गया था, वह पहली बड़ी चुनौती भी नहीं झेल सका। लोगों का कहना है कि कटाव की आशंका पहले से थी, लेकिन समय रहते मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा कार्य नहीं कराया गया। नतीजा यह हुआ कि सरकारी धन भी बह गया और गांव पर खतरा पहले से अधिक बढ़ गया।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ से पहले करोड़ों रुपये की योजनाओं की घोषणा होती है, लेकिन बाढ़ आते ही वे योजनाएं धराशायी हो जाती हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई तथा कोसी क्षेत्र में स्थायी और वैज्ञानिक कटावरोधी व्यवस्था की मांग की है।

वहीं, विभाग का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। कार्यपालक अभियंता के अनुसार प्रभावित स्थल पर जल्द मरम्मत और आवश्यक सुरक्षा कार्य कराया जाएगा। साथ ही कोसी नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विभाग तथा जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
हर साल बाढ़ और कटाव के बाद करोड़ों रुपये की योजनाओं का नदी में समा जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या योजनाओं के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता हो रहा है, या फिर हर साल अस्थायी उपायों पर ही सरकारी धन खर्च किया जा रहा है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कोसी प्रभावित लोगों को स्थायी राहत कब मिलेगी और सरकारी योजनाएं नदी में बहने का सिलसिला कब रुकेगा?

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