बिहार के शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक अपनी लंबित मांगों को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। इसी क्रम में भागलपुर इकाई के प्रतिनिधि विक्रम कुमार, दिलीप कुमार और राजवर्धन कुमार ने बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेन्द्र से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की सबसे बड़ी मांग पूर्णकालिक कार्य व्यवस्था लागू करने की है, ताकि वे विद्यालयों में प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।
मुलाकात के दौरान पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेन्द्र ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और आश्वासन दिया कि वे इस विषय पर शिक्षा मंत्री से चर्चा करेंगे तथा सरकार स्तर पर इस दिशा में सकारात्मक पहल करने का प्रयास करेंगे।
गौरतलब है कि बिहार में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों की बहाली वर्ष 2022 में हुई थी। नियुक्ति के समय उनका मासिक मानदेय मात्र 8,000 रुपये निर्धारित किया गया था, जिसे अनुदेशकों ने दैनिक मजदूरी से भी कम बताते हुए विरोध जताया था। इसके बाद लगातार धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात और सरकार से कई दौर की वार्ता के बाद चुनाव के दौरान उनका मानदेय बढ़ाकर 16,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। हालांकि, अनुदेशकों का कहना है कि उनकी मूल मांग आज भी अधूरी है।
अनुदेशकों का मानना है कि शारीरिक शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण आधार है। यदि उन्हें पूर्णकालिक कार्य नहीं मिलेगा, तो विद्यालयों में खेल, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करना संभव नहीं होगा। इसी कारण राज्यभर के शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक एक बार फिर संगठित होकर अपनी मांगों को लेकर जनप्रतिनिधियों से समर्थन जुटा रहे हैं।
कुछ दिन पहले पटना में शिक्षा मंत्री के सम्मान में आयोजित स्वागत एवं सम्मान समारोह के दौरान भी अनुदेशकों ने अपनी मांग रखी थी। उस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने मीडिया के समक्ष 100 दिनों के भीतर इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। अब अनुदेशकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उनकी पूर्णकालिक कार्य की मांग पर ठोस फैसला लेगी।
संवाददाता : रजनीश कुमार





