गया: देश की सेवा में अपना पैर गंवाने वाले भारतीय सेना के सूबेदार सोमन राणा आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। वर्ष 2006 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकियों द्वारा बिछाई गई लैंडमाइन की चपेट में आने से उन्होंने अपना दाहिना पैर खो दिया, लेकिन इसे उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने न सिर्फ दोबारा सेना की सेवा की, बल्कि पैरा एथलेटिक्स में भी देश का नाम रोशन किया।
गया के लक्खीबाग निवासी और किसान परिवार से आने वाले सोमन राणा अब सीटिंग पैरा शॉटपुट खिलाड़ी के रूप में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए चयनित हुए हैं। उनके साथ बिहार के नालंदा के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह पहला अवसर है जब बिहार के पैरा खिलाड़ियों का चयन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुआ है।
सोमन बताते हैं कि हादसे के बाद उन्होंने खुद से कहा कि यह दिव्यांगता नहीं, बल्कि देश सेवा के लिए दिया गया बलिदान है। इसी सोच ने उन्हें नई ताकत दी। परिवार, खासकर पत्नी और पिता का साथ उनके संघर्ष की सबसे बड़ी शक्ति बना।
साल 2012 में सेना के पैरा खिलाड़ियों से प्रेरित होकर उन्होंने पैरा खेलों की शुरुआत की और 2017 से पुणे स्थित आर्मी पैरालंपिक स्पोर्ट्स नोड में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 2023 एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर मेडल, 2025 खेलो इंडिया में गोल्ड मेडल जीता। वे दो पैरालंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
फिलहाल सोमन बेंगलुरु में रोज़ आठ घंटे से अधिक अभ्यास कर रहे हैं। उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 15.17 मीटर है, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स में 16.60 मीटर का रिकॉर्ड तोड़कर गोल्ड जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेंगे।
2025 में विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित सोमन राणा कहते हैं कि उनका हर मेडल उन सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनका सपना है कि ग्लासगो में तिरंगा सबसे ऊंचा लहराए और बिहार के साथ पूरे देश का नाम रोशन हो।







