पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में आयोजित एक जातीय सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन ने अपने संबोधन के दौरान कई बड़े राजनीतिक बयान दिए। उनके भाषण का वीडियो और बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
सभा को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने अपने पुत्र और पूर्व विधायक चेतन आनंद का जिक्र करते हुए कहा कि उनके साथ राजनीतिक रूप से न्याय नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि चेतन आनंद को लेकर तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट पूरी तरह गलत थी। उन्होंने मंच से कहा कि “जो लोग पहली बार चुनाव लड़कर आए, वे विधायक भी बन गए और मंत्री भी बना दिए गए, लेकिन चेतन आनंद के साथ ऐसा नहीं हुआ।”
आनंद मोहन यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने समाज से जुड़े बिहार के छह सांसदों पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “हमारे समाज के छह सांसद जीतकर संसद पहुंचे हैं, लेकिन किसी के पास बोलने का साहस नहीं है। सभी अक्लोल-बकलोल हैं। क्या उनमें से कोई मंत्री बनने लायक नहीं था? सभी को सिर्फ पार्टी का पट्टा गले में लपेटकर भौंकने का काम दिया गया है।”
उनके इस बयान के बाद सम्मेलन में मौजूद लोगों के बीच हलचल देखी गई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आनंद मोहन के इस बयान के कई राजनीतिक मायने निकाले जा सकते हैं। खासकर अपने बेटे चेतन आनंद को लेकर सार्वजनिक रूप से जताया गया उनका दर्द और सांसदों पर की गई टिप्पणी आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बन सकती है।
हालांकि, आनंद मोहन के इन बयानों पर संबंधित सांसदों या किसी राजनीतिक दल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





