समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों ने अपनी सतर्कता, सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता से कई लोगों की जान बचाकर मिसाल पेश की है। उन्होंने यह साबित किया कि उनकी जिम्मेदारी केवल ट्रेन को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लोगों की जिंदगी बचाने की भी है। इन साहसिक कार्यों के लिए पूर्व मध्य रेल प्रशासन ने सभी रेलकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
पहली घटना 22 जून 2026 की है। ट्रेन संख्या 63346 (समस्तीपुर-सहरसा सवारी गाड़ी) सलौना और इमली स्टेशनों के बीच पहुंची तो लोको पायलट अभय कुमार और सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार ने देखा कि एक महिला अपने छोटे बच्चे के साथ रेलवे ट्रैक पर लेटी हुई है। उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी, दोनों को सुरक्षित ट्रैक से हटाया और ग्रामीणों के सुपुर्द किया। बाद में महिला ने बताया कि पारिवारिक परेशानियों से तंग आकर उसने यह कदम उठाया था।
दूसरी घटना 1 मई 2026 की है, जब रक्सौल-दरभंगा सवारी गाड़ी के लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने ढेंग और रीगा स्टेशनों के बीच ट्रैक पर एक बच्चे को लेटा देखा। तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाने से ट्रेन समय रहते रुक गई और बच्चे की जान बच गई।
तीसरी घटना 22 मई 2026 को हुई, जब मालगाड़ी चला रहे लोको पायलट मनोज कुमार और सहायक लोको पायलट मनी भूषण कुमार ने ट्रैक पर एक महिला को लेटा देखा। भारी मालगाड़ी होने के बावजूद उन्होंने आपातकालीन ब्रेक लगाकर ट्रेन रोकी, महिला को समझाया और सुरक्षित ग्रामीणों के हवाले किया।
सम्मान समारोह में मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ज्योति प्रकाश मिश्रा ने कहा कि इन रेलकर्मियों की सतर्कता और मानवीय संवेदनशीलता के कारण कई परिवार उजड़ने से बच गए। वहीं लोको पायलटों ने कहा कि लोगों की जान बचा पाना उनके जीवन का सबसे बड़ा संतोष है।






