झारखंड के जामताड़ा जिले में मुहर्रम का पर्व धार्मिक आस्था, भाईचारे और आपसी सौहार्द के साथ शांतिपूर्ण माहौल में मनाया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों में निकाले गए भव्य ताज़िया जुलूसों में हजारों लोगों ने भाग लिया। इस दौरान पारंपरिक अखाड़ों के खिलाड़ियों ने लाठी, तलवार और भाले के हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों का मन मोह लिया। पूरे आयोजन में उत्साह, अनुशासन और सामाजिक एकता की अनूठी तस्वीर देखने को मिली।
जामताड़ा शहर के अलावा नारायणपुर, करमाटांड़, फतेहपुर, नाला और कुंडहित प्रखंडों में भी मुहर्रम के अवसर पर पारंपरिक ताज़िया जुलूस निकाले गए। शहर के सुभाष चौक पर विभिन्न गांवों और मोहल्लों के ताज़िए एकत्र हुए, जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। अखाड़ों के युवाओं ने अपने पारंपरिक युद्ध कौशल का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे।
मुहर्रम जुलूस के दौरान जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद नजर आया। उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। प्रशासन की सक्रियता और लोगों के सहयोग से कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
आयोजन के दौरान कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी अखाड़ों के खिलाड़ियों के साथ पारंपरिक लाठी खेल में हिस्सा लेकर लोगों का उत्साह बढ़ाया। इस अवसर पर लोगों ने देश में अमन, शांति, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।
मुहर्रम का यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और आपसी सद्भाव का भी संदेश देता नजर आया। जामताड़ा में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ यह पर्व एक बार फिर जिले की गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द की मजबूत परंपरा का प्रतीक बन गया।
संवाददाता : संतोष कुमार





