मायागंज अस्पताल में कैंसर से जूझ रहे शिक्षक, 13 वर्षीय बेटी के सहारे चल रही जिंदगी


भागलपुर: मायागंज अस्पताल में भर्ती एक कैंसर पीड़ित शिक्षक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उनकी हालत न केवल बीमारी की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि समाज और व्यवस्था के सामने कई सवाल भी खड़े करती है। शिक्षक पिछले करीब डेढ़ वर्ष से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज भी प्रभावित हो रहा है।


जानकारी के अनुसार, शिक्षक की पत्नी का निधन चार वर्ष पूर्व हार्ट अटैक से हो गया था। पत्नी की मौत के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई। वर्तमान में उनकी 13 वर्षीय बेटी श्वेता कुमारी ही उनका एकमात्र सहारा है। परिवार में देखभाल करने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है। ऐसे में बेटी अपने पिता की सेवा में दिन-रात जुटी हुई है।


परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षक की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। घर का खर्च चलाना तो दूर, दो वक्त की रोटी का इंतजाम भी कई बार दूसरों की मदद पर निर्भर हो जाता है। कैंसर के इलाज में होने वाले भारी खर्च ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।


शिक्षक की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद उनके कुछ शिष्य और समाजसेवी मदद के लिए आगे आए हैं। समाजसेवी एवं शिक्षक रौशन कुमार राठौर ने अस्पताल पहुंचकर आर्थिक सहायता प्रदान की और लोगों से भी मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में समाज को आगे आकर जरूरतमंद लोगों का साथ देना चाहिए ताकि मरीज का इलाज बेहतर तरीके से हो सके।

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वहीं, 13 वर्षीय श्वेता कुमारी ने भावुक होकर बताया कि उनके पिता ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा हैं। वह चाहती हैं कि उनके पिता जल्द स्वस्थ होकर घर लौटें। बेटी की इस पीड़ा ने अस्पताल में मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।


इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों की स्थिति पर भी चर्चा छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई दावे करती है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अब भी पर्याप्त सहायता नहीं मिल पा रही है। फिलहाल कैंसर पीड़ित शिक्षक का इलाज मायागंज अस्पताल में जारी है और उनकी बेटी सहित शुभचिंतक उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।

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