पटना: देश में जहां आम लोगों के लिए सार्वभौमिक पेंशन व्यवस्था सीमित है, वहीं बिहार में जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली पेंशन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। राज्य में पूर्व विधायकों और विधान पार्षदों को न केवल उच्च पेंशन मिलती है, बल्कि कई मामलों में एक ही नेता को एक से अधिक पेंशन का लाभ भी मिलता है।
मौजूदा नियमों के अनुसार बिहार में किसी विधायक को पहले वर्ष के लिए लगभग 45 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलती है। इसके बाद हर अतिरिक्त वर्ष पर 4 हजार रुपये की बढ़ोतरी होती है। यही वजह है कि तीन या उससे अधिक कार्यकाल पूरे करने वाले नेताओं की पेंशन एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच जाती है। पूर्व विधायक के निधन पर उनके जीवनसाथी को 75 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन देने का भी प्रावधान है।
इसके अलावा पूर्व विधायकों को इलाज का पूरा खर्च, यात्रा के लिए सालाना 2 लाख रुपये तक की सुविधा और अन्य भत्ते भी मिलते हैं। खास बात यह है कि बिहार में विधायक की पेंशन सांसदों से भी अधिक है, जहां सांसदों को लगभग 25 हजार रुपये मासिक पेंशन मिलती है।
Bihar में कुछ नेता विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य और विधान परिषद सदस्य रहने के कारण चार-चार पेंशन तक प्राप्त कर रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति अन्य श्रेणियों जैसे प्रोफेसर या जेपी सेनानी भी रहा हो, तो उसकी कुल पेंशन 1.5 लाख रुपये से अधिक हो सकती है।
दूसरी ओर नीतीश कुमार, के कार्यकाल में नियमों को लचीला बनाया गया, जिससे पेंशन व्यवस्था का दायरा बढ़ा। हालांकि पंजाब जैसे राज्यों ने ‘वन MLA, वन पेंशन’ लागू कर एक उदाहरण पेश किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक व्यक्ति को कई पेंशन देना वित्तीय बोझ बढ़ाता है और इसमें सुधार की जरूरत है, ताकि व्यवस्था अधिक संतुलित और न्यायसंगत बन सके।
