पटना में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद शुक्रवार को ने 4 देश रत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मुलाकात की। इस दौरान एनडीए के कई नेता और समर्थक उनसे मिलने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने सभी से एक-एक कर मुलाकात की और उनका अभिवादन स्वीकार किया।

मुलाकात के दौरान एक ऐसा क्षण सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी। मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधि ने उन्हें पारंपरिक टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन सम्राट चौधरी ने टोपी पहनने से इनकार कर दिया। उन्होंने टोपी हाथ में ले ली और बाद में अपने पीछे खड़े गार्ड को थमा दी, जबकि गमछा पहनकर सम्मान स्वीकार किया। यह पूरा घटनाक्रम वीडियो में भी सामने आया है।

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में कई लोग फूल-माला, शॉल और गमछा लेकर पहुंचे थे। उसी क्रम में एक व्यक्ति टोपी भी लेकर आया था। हालांकि मुख्यमंत्री ने मिथिला की पारंपरिक पाग जरूर पहनी, लेकिन टोपी से दूरी बनाए रखी।

इस मामले पर विपक्ष ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सभी समुदायों का सम्मान करते थे और टोपी भी पहनते थे, जबकि भाजपा नेताओं का रवैया अलग दिखता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री पद पर बैठने वाले व्यक्ति को सभी वर्गों का सम्मान करना चाहिए।

यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता ने सार्वजनिक मंच पर टोपी पहनने से इनकार किया हो। ने भी 2011 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ऐसा किया था, जिसे लेकर उस समय भी बहस छिड़ी थी।

फिलहाल सम्राट चौधरी के इस कदम को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। इसे कुछ लोग उनकी राजनीतिक रणनीति और वोट बैंक से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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