बिहार की राजधानी पटना से महज 38 किलोमीटर दूर मसौढ़ी के डेवां गांव से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां धनरूआ प्रखंड के डेवां पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, जो 1955 में स्थापित हुआ था, आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। हैरानी की बात यह है कि 500 से अधिक छात्रों वाले इस सरकारी स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है।
स्कूल जाने के लिए बच्चों और शिक्षकों को महज डेढ़ फीट चौड़ी कच्ची पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जब कीचड़ और फिसलन के कारण हादसों का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव के जमींदार स्वर्गीय राम सुहावन सिंह ने करीब दो एकड़ जमीन दान में देकर इस स्कूल की स्थापना कराई थी, लेकिन आज तक इसके लिए रास्ता नहीं बन पाया।
इस संकरे रास्ते के कारण बच्चे आए दिन गिरकर घायल हो जाते हैं। शिक्षक-शिक्षिकाएं भी कई बार चोटिल हो चुके हैं। छात्रा शिवानी कुमारी बताती हैं कि स्कूल आने-जाने में डर लगता है और हर कदम संभलकर रखना पड़ता है। वहीं अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने में असहज महसूस करते हैं।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अनंत श्रीनिवास के अनुसार, स्कूल परिसर में मिडिल और हाई स्कूल दोनों संचालित हैं, जहां कुल 530 छात्र नामांकित हैं और 14 शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि बरसात के समय छात्रों की उपस्थिति घटकर 30 प्रतिशत रह जाती है। इस समस्या को लेकर कई बार विभाग को लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
गांव के मुखिया संतोष कुमार का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए सामाजिक स्तर पर प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीन विवाद सबसे बड़ी बाधा है। वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा कुमारी ने भी माना कि मामला उनके संज्ञान में है और समाधान के लिए पहल की जा रही है। मसौढ़ी विधायक अरुण मांझी ने भी आश्वासन दिया है कि निरीक्षण कर जल्द समाधान निकाला जाएगा, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
