पटना की सड़कों पर इन दिनों एक बेटे की बेबसी और उम्मीद साफ नजर आ रही है. नेपाल के रहने वाले राजकुमार गिरी के अचानक लापता होने के बाद उनका बेटा जयराम गिरी हजारों किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से पटना पहुंचा है. आंखों में आंसू और दिल में उम्मीद लिए जयराम अपने पिता की तलाश में हर दरवाजा खटखटा रहा है.
जयराम गिरी लंबे समय से मेलबर्न में अपने परिवार के साथ रहते हैं, जहां वह एक क्लब चलाते हैं. उनके पिता राजकुमार गिरी नेपाल में वकालत करते हैं और एक सम्मानित व्यक्ति माने जाते हैं. परिवार के अनुसार, गुरुवार को राजकुमार गिरी नेपाल के विराटनगर से पटना आने के लिए बस में सवार हुए थे. लेकिन इसके बाद से उनका मोबाइल बंद हो गया और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया.
नेपाल पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज में पुष्टि की कि वह बस में बैठकर पटना के लिए रवाना हुए थे. इसके बाद जयराम खुद मेलबर्न से काठमांडू होते हुए पटना पहुंचे. भावुक कर देने वाला पल तब आया जब जयराम उसी बस की उसी सीट पर बैठकर पटना पहुंचे, जिस पर उनके पिता यात्रा कर रहे थे. उन्हें उम्मीद थी कि शायद इस सफर से कोई सुराग मिल सके.
पटना पहुंचते ही जयराम ने गांधी मैदान थाना में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने उन्हें शहर के विभिन्न इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने का भरोसा दिया है और पोस्टर लगाने की सलाह भी दी है. अब जयराम अपने पिता की तस्वीर लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं और लोगों से पूछ रहे हैं—क्या आपने इन्हें कहीं देखा है?
जयराम बताते हैं कि उनके पिता बेहद सरल स्वभाव के हैं, किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और न ही किसी राजनीतिक गतिविधि से जुड़े हैं. वह धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं, इसलिए परिवार को आशंका है कि कहीं वह किसी मंदिर की ओर तो नहीं चले गए.
एक सप्ताह बीतने को है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. फिर भी जयराम की उम्मीद जिंदा है. उनका कहना है कि वह अपने पिता को ढूंढे बिना वापस नहीं लौटेंगे. यह कहानी सिर्फ एक गुमशुदगी की नहीं, बल्कि एक बेटे के अटूट प्यार और उम्मीद की है.
