बिहार की राजधानी पटना का पाटलिपुत्र जंक्शन आने वाले समय में एक बड़े और आधुनिक रेलवे हब के रूप में उभरने जा रहा है। रेल मंत्रालय की अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद पाटलिपुत्र जंक्शन, पटना जंक्शन का एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेगा। इससे राजधानी में बढ़ते रेल दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी। यह स्टेशन उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला एक अहम रेल संपर्क केंद्र है और शहरी व अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लाखों यात्रियों की जरूरतों को पूरा करता है।

रेल मंत्रालय ने देशभर के प्रमुख स्टेशनों के दीर्घकालिक विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की है। इसी योजना के तहत पाटलिपुत्र स्टेशन को भी शामिल किया गया है। यहां यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा, पहुंच और आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना पर 49.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

वर्तमान में पाटलिपुत्र स्टेशन से 33 जोड़ी मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 10 जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें संचालित होती हैं। स्टेशन पर पांच प्लेटफॉर्म हैं और प्रतिदिन करीब 21,734 यात्री यहां से यात्रा करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, यूटीएस से प्रतिदिन औसत 7.58 लाख रुपये और पीआरएस से 31.26 लाख रुपये की आय हो रही है, जो इसकी बढ़ती उपयोगिता को दर्शाता है।

इसके साथ ही पाटलिपुत्र स्टेशन के पास अत्याधुनिक कोचिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी तेजी से जारी है। वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव के लिए बनाए जा रहे इस कॉम्प्लेक्स की लागत अब बढ़कर 283.16 करोड़ रुपये हो गई है। इसमें स्टेबलिंग, वॉशिंग, वर्कशॉप और इंस्पेक्शन जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इस पूरे विकास के बाद पाटलिपुत्र जंक्शन पटना का एक प्रमुख और आधुनिक रेलवे केंद्र बन जाएगा।

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