नवादा जिले से एक अनोखा और चर्चित आंदोलन सामने आया है, जहां नारदीगंज प्रखंड के ओड़ो पंचायत के पूर्व मुखिया अरविंद मिश्रा ने एक ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ ली है। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक ओड़ो रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित नहीं होता, तब तक वे अपने पैरों में जूता-चप्पल नहीं पहनेंगे।

वैशाख की भीषण गर्मी और तपती सड़कों के बावजूद अरविंद मिश्रा नंगे पैर घूमकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनका यह सत्याग्रह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। मिश्रा का कहना है कि ओड़ो स्टेशन के आसपास करीब दो दर्जन गांव बसे हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 13 हजार है। ये लोग रोज़गार, शिक्षा और इलाज के लिए इसी स्टेशन पर निर्भर हैं, लेकिन यहां एक भी एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव नहीं है।

रेलवे आंकड़ों के मुताबिक, ओड़ो स्टेशन से करीब 28 ट्रेनों का आवागमन होता है, जिनमें अधिकांश मालगाड़ियां शामिल हैं। इसके बावजूद यहां सिर्फ दो पैसेंजर ट्रेनों का ही ठहराव है, जबकि कोडरमा-पटना इंटरसिटी और वैशाली-गया एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें बिना रुके गुजर जाती हैं। यात्रियों को मजबूरन राजगीर या तिलैया जाना पड़ता है।

अरविंद मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और रेल मंत्री को पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने नवादा सांसद विवेक ठाकुर पर भी उपेक्षा का आरोप लगाया है। हालांकि, स्थानीय विधायक विभा देवी ने आश्वासन जरूर दिया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई पहल नहीं हुई।

मिश्रा का कहना है कि यह केवल ट्रेन ठहराव की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की भी लड़ाई है। स्टेशन पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। एक नलकूप लगा है, लेकिन वह भी बेकार पड़ा है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि 1 मई, मजदूर दिवस से उनका आंदोलन और तेज होगा। यह सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा, जब तक ओड़ो स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव और यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं।

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