दुनिया में अत्यधिक गरीबी तेजी से कम हो रही है। 1990 में विश्व की करीब 40 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गरीबी में जीवन बिता रही थी, जबकि 2026 तक यह आंकड़ा घटकर लगभग 10 प्रतिशत रह गया है। भारत और चीन जैसे देशों में सुधार ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।

विश्व बैंक, OWID और अन्य रिपोर्टों के अनुसार भारत में 1985 में अत्यधिक गरीबी दर 51.8 प्रतिशत थी, जो 2022 तक घटकर 5.3 प्रतिशत रह गई। अनुमान है कि 2030 तक भारत में यह दर 3 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच सकती है। वहीं चीन में अत्यधिक गरीबी लगभग समाप्त हो चुकी है।

हालांकि दुनिया के कई देशों में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। नाइजीरिया, सूडान, सोमालिया, मेडागास्कर, कांगो और यमन जैसे देशों में बड़ी आबादी आज भी भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध, भ्रष्टाचार, कमजोर सरकारी व्यवस्था, प्राकृतिक आपदाएं और बेरोजगारी इसके प्रमुख कारण हैं।

हाल ही में इटली के रोम में UNECE की कार्यशाला में यह सामने आया कि ग्रामीण इलाकों में गरीबी शहरी क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक है। दुनिया के हर चार अत्यधिक गरीब लोगों में तीन गांवों में रहते हैं। बच्चों और महिलाओं पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बहुआयामी गरीबी भी तेजी से घटी है। सरकारी योजनाओं, साफ पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार से स्थिति में सुधार हुआ है। आर्थिक सर्वे के अनुसार देश के अधिकांश गांव अब खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं।

दूसरी ओर पाकिस्तान में गरीबी घटने की रफ्तार धीमी रही। वहां 1985 में अत्यधिक गरीबी 80.6 प्रतिशत थी, जो 2022 में भी 23.6 प्रतिशत रही।

विशेषज्ञ मानते हैं कि गरीबी खत्म करने के लिए ग्रामीण रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

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