बिहार के जमुई जिले से एक बेहद महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण खबर सामने आई है, जहां वन विभाग की टीम ने गिद्धेश्वर पहाड़ियों के दुर्गम शैलाश्रयों में हजारों वर्ष पुराने शैल चित्र (रॉक पेंटिंग्स) खोजे हैं। ये खोज न केवल जिले बल्कि पूरे राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने वाली मानी जा रही है। अब बिहार सरकार इन प्राचीन धरोहरों के संरक्षण और उन पर गहन शोध की योजना बना रही है, ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
वन प्रमंडल के विशेष अन्वेषण दल ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में यह खोज की है। विशेषज्ञों के अनुसार ये शैल चित्र नवपाषाण काल, यानी लगभग 10,000 ईसा पूर्व से 2,000 ईसा पूर्व के बीच के हो सकते हैं, जो आगे चलकर प्रारंभिक ऐतिहासिक काल तक जुड़े हुए हैं। यह वह दौर था जब मानव जीवन में बड़ा बदलाव आया—खानाबदोश जीवन से हटकर स्थायी निवास, कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई।
इन शैल चित्रों में उस समय के मानव जीवन, सामूहिक गतिविधियों, उत्सवों और वन्य जीवों के चित्रण देखने को मिलते हैं। रंगों और रेखाओं के माध्यम से बनाई गई ये आकृतियां उस युग के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। गिद्धेश्वर की पहाड़ियों पर उकेरे गए ये चित्र आज के आधुनिक समाज को हजारों साल पुराने जीवन से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल ने बताया कि इन चित्रों के संरक्षण का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। 2022 में शुरू हुई पहल को आगे बढ़ाते हुए अब इस स्थल को शोध और अध्ययन के लिए भी विकसित किया जाएगा।
वहीं, जमुई के जिला पदाधिकारी नवीन ने कहा कि यह ऐतिहासिक संपदा जिले की पहचान है। प्रशासन इस क्षेत्र के समग्र विकास और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। भविष्य में इसे पर्यटन और रिसर्च के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
इस महत्वपूर्ण अभियान का नेतृत्व तेजस जायसवाल ने किया, जिसमें उनकी टीम के सदस्यों ने कठिन परिस्थितियों में साहस और समर्पण का परिचय दिया। यह खोज बिहार के गौरवशाली अतीत को फिर से उजागर करने की दिशा में एक अहम कदम है।
