बिहार में सत्ता परिवर्तन से ठीक पहले कड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में बड़ी कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से 37 अंचलाधिकारियों (सीओ) समेत कुल 41 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई को उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के सख्त रुख से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, निलंबित अधिकारियों पर कर्तव्य में लापरवाही, सरकारी आदेशों की अनदेखी और अनुशासनहीनता जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। राजस्व कर्मियों की लंबे समय से जारी हड़ताल के दौरान कई अंचलाधिकारियों ने सरकारी कार्यों में सक्रिय भागीदारी नहीं की, जिससे अंचल स्तर पर कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।
बताया जाता है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से जुड़े कार्यक्रमों में भी अपेक्षित सहयोग नहीं किया और राजस्व वसूली जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही बरती। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा और कई जरूरी काम लंबित रह गए।
प्रशासनिक नियमावली 2005 के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद सभी निलंबित अधिकारियों की शक्तियां तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही उन्हें आवंटित सरकारी वाहन, कार्यालय की चाबियां और अन्य संसाधन भी वापस ले लिए गए हैं।
इस कदम को प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने और लापरवाही पर सख्त संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार के गठन से पहले यह कार्रवाई एक स्पष्ट संकेत है कि जिम्मेदारियों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिलहाल विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
