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गयाजी में विष्णुपद कॉरिडोर का विरोध तेज, पंडा समाज बोला- विकास चाहिए, विरासत का विनाश नहीं

बिहार के गया स्थित विश्व प्रसिद्ध मोक्ष स्थली विष्णुपद मंदिर में प्रस्तावित श्री विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर का निर्माण शुरू होने से पहले ही इसका जोरदार विरोध शुरू हो गया है। गयापाल पंडा समाज, स्थानीय निवासी, दुकानदार और संत समाज इसे गया जी की प्राचीन संस्कृति, धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर को मिटाने की साजिश बता रहे हैं।

कॉरिडोर का नक्शा संवास सदन समिति कार्यालय में लगाए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया। लोगों का कहना है कि इस योजना से पुश्तैनी घर, पुराने मंदिर, मठ और धर्मशालाएं प्रभावित होंगी। विरोध में लोगों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर बैनर लगाकर आंदोलन शुरू कर दिया है।

करीब 57 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस मुद्दे पर आयोजित प्रेस वार्ता में विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभूलाल विट्ठल ने भी आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पहले विकास के उद्देश्य से दिए गए समर्थन पत्र का अब वह खंडन करते हैं, क्योंकि वर्तमान योजना से प्राचीन धरोहरों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने जिला प्रशासन को लिखित आपत्ति भी भेजी है।

गया पीठाधीश्वर स्वामी श्री वेंकटेश प्रसन्नाचार्य जी महाराज ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना केवल टेबल पर बैठकर बनाई गई, जबकि स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों से राय नहीं ली गई। उनका कहना है कि यदि जमीन पर समीक्षा कर योजना बनाई जाती तो इतना विरोध नहीं होता।

तीर्थ वीर सुधारिणी समिति के अध्यक्ष गजाधर लाल कटरियार ने दावा किया कि कॉरिडोर निर्माण से चार फाटक से देवघाट तक का पुराना क्षेत्र समाप्त हो सकता है, जिससे पांच हजार से अधिक लोग प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार विकास करे, लेकिन सनातन परंपरा और प्राचीन पहचान को खत्म कर नहीं।

इधर विष्णुपद मंदिर परिसर में जन-जागरण अभियान भी शुरू हो गया है, जिसमें पंडा समाज, संत समाज, महिलाएं और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होकर कॉरिडोर योजना का विरोध कर रहे हैं।

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