बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पद संभालते ही अपनी कार्यशैली का साफ संकेत दे दिया है। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद बुधवार को पटना सचिवालय में हुई पहली उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने अफसरशाही को सख्त संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब बिहार में सुस्ती, लापरवाही और फाइलों को लंबित रखने की पुरानी परंपरा नहीं चलेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि काम में देरी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अनावश्यक पत्राचार और फाइलों को इधर-उधर घुमाने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार के प्रति सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की होगी और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई तय है।
मुख्यमंत्री ने राज्य की सभी विकास परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश देते हुए कहा कि काम की रफ्तार दोगुनी की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करें, ताकि आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
इसके साथ ही सीएम ने जमीन विवादों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिकांश सामाजिक तनाव और आपसी विवादों की जड़ भूमि संबंधी मामले ही होते हैं, इसलिए इनका त्वरित और पारदर्शी समाधान बेहद जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने प्रखंड, अंचल और थाना स्तर तक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागों से कार्यों की अपडेटेड रिपोर्ट भी मांगी, जिसकी जल्द ही समीक्षा की जाएगी।
“हमने गांव-गांव जाकर स्थिति देखी है, अब बिहार को विकसित राज्य बनाने के लिए सभी को अनुशासन और समर्पण के साथ काम करना होगा।”
बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और डीजीपी विनय कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के इस सख्त रुख से साफ है कि अब बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा और गति मिलने वाली है।
