पटना: बिहार विधान परिषद की एक सीट को लेकर चल रहा संशय आखिरकार खत्म हो गया है। Mangal Pandey के विधायक चुने जाने के बाद खाली हुई सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद कार्यकर्ता सूर्यकुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) को उम्मीदवार बनाया है। इस निर्णय से एनडीए के सहयोगी दल भी हैरान रह गए हैं।

इस सीट पर कई दावेदार थे, जिनमें सहयोगी दलों की भी नजर थी। खास तौर उपेंद्र कशवाहा पर अपने बेटे दीपक प्रकाश के लिए टिकट चाहते थे, लेकिन बात नहीं बन सकी। बीजेपी ने साफ संकेत दिया कि वह इस बार किसी दबाव में आने वाली नहीं है और अपने संगठन के पुराने कार्यकर्ता को प्राथमिकता देगी।

सूर्य कुमार शर्मा, जो भूमिहार समाज से आते हैं, पार्टी के अनुभवी और जमीनी नेता माने जाते हैं। वर्तमान में वे बीजेपी प्रदेश कार्यालय के प्रभारी हैं और लंबे समय से संगठन में अहम जिम्मेदारियां निभाते आ रहे हैं।  उन्हें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का करीबी और भरोसेमंद रणनीतिकार भी माना जाता है।

उनकी उम्मीदवारी पर सीएम सम्राट चौधरी ने बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी निष्ठा, समर्पण और वर्षों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि सूर्य कुमार शर्मा जनसेवा और संगठन को और मजबूती देंगे। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ संजय कमार का कहना है कि बीजेपी अक्सर अपने फैसलों से सबको चौंकाती रही है और इस बार भी उसने वही किया। उनके अनुसार, यह निर्णय साफ संदेश देता है कि अब पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों के दबाव से स्वतंत्र होकर फैसले ले रही है।

कुल मिलाकर, बीजेपी का यह कदम न सिर्फ संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का संकेत है, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलते शक्ति संतुलन को भी दर्शाता है।

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