भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में मंगलवार को “नो व्हीकल डे” मनाया गया। भारत सरकार और प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुपालन में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय के कुलपति, अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक और कर्मचारी बिना निजी वाहन के साइकिल या पैदल चलकर अपने कार्यालय पहुंचे। इस आयोजन के जरिए पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया गया।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में मंगलवार को “नो व्हीकल डे” के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के तहत आज सभी अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी निजी वाहनों का उपयोग छोड़ साइकिल या पैदल चलकर कार्यालय पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ने कहा कि साइकिल चलाना और पैदल चलना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और देश की आर्थिक मजबूती के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधनों की बढ़ती खपत और सीमित उपलब्धता को देखते हुए ईंधन संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
कुलपति ने कहा कि यदि लोग छोटी दूरी तय करने के लिए वाहनों के बजाय साइकिल या पैदल चलने की आदत अपनाएं, तो इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ प्रदूषण में भी काफी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि “नो व्हीकल डे” मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग नियमित रूप से साइकिल अथवा पैदल चलने की आदत विकसित करें, ताकि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण के निर्माण में योगदान दिया जा सके। साथ ही यह पहल प्रधानमंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री के संदेश को दैनिक जीवन में अपनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक संदेश दिया। पूरे परिसर में “नो व्हीकल डे” को लेकर उत्साह का माहौल देखा गया।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में मनाया गया “नो व्हीकल डे”, साइकिल और पैदल चलने का दिया संदेश


