बिहार के जमुई जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग मरीज की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि उसे ले जा रही एंबुलेंस का तेल बीच रास्ते में खत्म हो गया।
जानकारी के अनुसार, झाझा प्रखंड के बाबू बांक गांव निवासी 75 वर्षीय धीरज रविदास की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जमुई सदर अस्पताल लाया गया, जहां जांच में सिर में खून जमने की बात सामने आई। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना रेफर कर दिया।
गुरुवार दोपहर करीब 1:11 बजे 102 एंबुलेंस से मरीज को पटना ले जाया जा रहा था। परिजनों के मुताबिक, रास्ते में सिकंदरा के पास चालक ने केवल 100 रुपये का तेल डलवाया। इसके बाद एंबुलेंस जैसे ही मतासी के पास पहुंची, महज 25 किलोमीटर चलने के बाद ही उसका तेल खत्म हो गया।
भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच एंबुलेंस सड़क किनारे खड़ी हो गई। परिजनों का आरोप है कि चालक ने समय पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की और मरीज को घंटों तक उसी हालत में छोड़ दिया गया। करीब दो घंटे तक तड़पने के बाद 3:31 बजे धीरज रविदास ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया।
मौत के बाद शव को वापस सदर अस्पताल लाया गया, जहां से परिजन शव लेकर घर लौट गए। मृतक के बेटे अजीत रविदास ने एंबुलेंस कंपनी और चालक पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से शिकायत और एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।
वहीं, एंबुलेंस कंपनी के प्रतिनिधि ने सफाई देते हुए कहा कि चालक के पास कार्ड था, लेकिन संबंधित पेट्रोल पंप पर तेल उपलब्ध नहीं था। दूसरी ओर, सिविल सर्जन ने घटना को निंदनीय बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
यह घटना एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है, जहां एक छोटी सी चूक ने एक कीमती जान ले ली।
