गया जिले के बाराचट्टी प्रखंड के पिपराही गांव में इन दिनों सुबह 9 बजे एक अनोखा नजारा देखने को मिलता है। गले में हारमोनियम टांगे संस्कृत शिक्षक रामजीत कुमार जब “स्कूल चलो तुम” गीत गाते हुए गलियों से गुजरते हैं, तो उनके साथ छात्र-छात्राओं की टोली भी होती है। कोई ढोलक बजाता है, कोई घंटी, कोई प्लेकार्ड थामे चलता है। जैसे ही हारमोनियम की धुन गूंजती है, गांव के दरवाजे खुलने लगते हैं और बच्चे स्कूल के लिए निकल पड़ते हैं।
करीब 150 घरों वाले इस गांव में एससी-एसटी समुदाय की संख्या अधिक है। कुछ साल पहले तक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी। बच्चे मजदूरी या अन्य कामों में लग जाते थे। लेकिन रामजीत कुमार की इस अनूठी पहल ने तस्वीर बदल दी। मध्य विद्यालय में आज 300 नामांकन हैं, जबकि हाई स्कूल और प्लस टू में भी लगभग 300 छात्र दर्ज हैं। रोजाना 200 से 250 बच्चे स्कूल पहुंच रहे हैं।
अगर किसी दिन उपस्थिति कम दिखती है, तो रामजीत सीधे बच्चों के घर पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि “बच्चे स्कूल नहीं आएं तो यह हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम जानें क्यों नहीं आए।” हारमोनियम बजाते हुए घर-घर जाना आसान नहीं था। शुरुआत में कुछ अभिभावकों ने विरोध भी किया, खासकर वे जो बच्चों से मजदूरी करवाते थे। लेकिन समय के साथ वही लोग आज उनकी तारीफ करते नहीं थकते।
कक्षा 8 के छात्र सुदामा कुमार बताते हैं कि पिता के निधन के बाद उनकी पढ़ाई छूटने लगी थी। आर्थिक तंगी के कारण वे स्कूल कम जाते थे। लेकिन रामजीत सर ने उन्हें और उनकी मां को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। आज सुदामा रोज स्कूल जाते हैं और दारोगा बनने का सपना देख रहे हैं। वहीं छात्र संदीप कुमार हंसते हुए कहते हैं, “अगर स्कूल नहीं जाऊंगा तो गुरुजी हारमोनियम लेकर घर पहुंच जाएंगे।”
रामजीत कुमार खुद बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता रिक्शा चालक थे। गरीबी में पले-बढ़े रामजीत ने आगे की पढ़ाई अपने दम पर पूरी की और बीएचयू से उच्च शिक्षा हासिल की। 2022 में शिक्षक बने और लगातार तीन परीक्षाओं में सफल होकर अब प्लस टू शिक्षक हैं।
उनकी इस मुहिम को शिक्षा विभाग ने भी सराहा है। 23 अप्रैल 2025 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने प्रशंसा पत्र भेजकर उनके नवाचारी प्रयास की तारीफ की थी।
आज पिपराही में “स्कूल चलो अभियान” रामजीत कुमार की अगुवाई में चलता है। शिक्षक और ग्रामीण भी साथ देते हैं। बच्चे न सिर्फ पढ़ाई में आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि संगीत भी सीख रहे हैं। हाल ही में स्कूल का एक छात्र जिला स्तरीय क्विज में दूसरे स्थान पर रहा।
कभी नक्सल प्रभावित रहा यह इलाका अब शिक्षा और संगीत की मधुर धुनों से गूंज रहा है। रामजीत कुमार की हारमोनियम सिर्फ एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि बदलाव की आवाज बन चुकी है।
