बिहार के गया शहर के वार्ड नंबर 34 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर गंगाजल’ योजना सवालों के घेरे में है। करोड़ों की परियोजना के बावजूद इलाके के करीब 5000 लोग आज भी पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गंगाजल योजना के तहत ब्लू पाइप तो बिछा दिए गए, लेकिन उनमें आज तक पानी नहीं आया।
वार्ड 34 की निवासी अकीरा खातून बताती हैं कि उन्हें रोज एक से डेढ़ किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। कई बार घंटों भटकने के बाद भी खाली बाल्टी लेकर लौटना पड़ता है। हाल ही में पानी लाने के दौरान गिरने से उनके पैर में चोट भी लग गई। उनका कहना है कि “घर में एक बूंद पानी नहीं है, लोग प्यासे मर रहे हैं।”
स्थानीय युवक निखिल कुमार और मोहम्मद आरिफ का कहना है कि गंगाजल योजना शुरू होने के बाद पुराने पाइपलाइन से मिलने वाला पानी भी अनियमित हो गया। अब कभी तीन दिन, कभी पांच दिन बाद पानी आता है। लोग रोज बाल्टी लेकर मोहल्लों में पानी खोजते फिरते हैं। कई परिवारों में लोग कई-कई दिनों तक स्नान तक नहीं कर पा रहे हैं।
सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि वे पिछले आठ दिनों से नहा नहीं पाए हैं। बच्चों को स्कूल भेजने में भी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि सरकार ने सिर्फ पाइप बिछाकर योजना का प्रचार कर दिया, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद खराब है।
वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ओम यादव के मुताबिक यह इलाका “ड्राई जोन” है, जहां 400 फीट गहराई तक बोरिंग की जरूरत है, लेकिन पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने बुडको और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
गौरतलब है कि दक्षिण बिहार के गया, राजगीर, बोधगया और नवादा में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए ‘हर घर गंगाजल’ योजना शुरू की गई थी। परियोजना की लागत बढ़कर 4,174 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। वहीं बुडको के कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार का दावा है कि समस्या दूर करने की कोशिश जारी है और जल्द पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।


