पटना: बिहार में सड़क हादसों का बढ़ता आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 10,394 लोगों की मौत हुई। 2024 में यह आंकड़ा 7,709 था। यानी एक साल में मौतों में करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पिछले 9 वर्षों में बिहार में सड़क हादसों में 64 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन हादसों का सबसे ज्यादा असर 18 से 35 वर्ष की उम्र के युवाओं पर पड़ रहा है। यही वह उम्र है जब युवा पढ़ाई, नौकरी, कारोबार और परिवार की जिम्मेदारियों में सक्रिय होते हैं।
बिहार में बेहतर सड़क नेटवर्क और तेज आवागमन के साथ हादसों का खतरा भी बढ़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक ओवर स्पीडिंग और रैश ड्राइविंग सड़क दुर्घटनाओं की सबसे बड़ी वजहों में शामिल हैं। इसके अलावा हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी, गलत दिशा में वाहन चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग, मोबाइल फोन का इस्तेमाल और नशे में ड्राइविंग भी हादसों को बढ़ावा देते हैं।
राज्य में 1,044 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। लेकिन सिर्फ पहचान से हादसे नहीं रुकेंगे। इन जगहों पर पर्याप्त रोशनी, रोड मार्किंग, साइनेज, बैरियर और बेहतर सड़क डिजाइन जैसे सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
एनआईटी पटना के विशेषज्ञ प्रो. संजीव सिन्हा के मुताबिक सड़क सुरक्षा के लिए 4E फॉर्मूला यानी इंजीनियरिंग, एजुकेशन, इनफोर्समेंट और इमरजेंसी केयर पर जोर देना होगा। उन्होंने बताया कि दोपहिया वाहन चालक हादसों के सबसे बड़े शिकार हैं और युवाओं में स्टंट भी गंभीर खतरा बन चुका है।
सड़क हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। हर मौत के पीछे एक परिवार, उसकी उम्मीदें और भविष्य जुड़ा होता है। ऐसे में तेज रफ्तार पर नियंत्रण, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन और ब्लैक स्पॉट पर प्रभावी सुरक्षा इंतजाम ही बिहार की सड़कों को सुरक्षित बना सकते हैं।





