जमुई में इस बार रक्षाबंधन का पर्व एक बेहद खास और भावुक तस्वीर लेकर आया। कभी अति नक्सल प्रभावित रहे गुरमाहा, चोरमारा, मुसहरीटांड, कुमरतरी, बीचलाटोला और जमुनियाटांड की महिलाएं पहली बार जिला मुख्यालय पहुंचीं। समाहरणालय के संवाद कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने जिलाधिकारी नवीन और पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल समेत अन्य अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी। यह सिर्फ रक्षाबंधन का त्योहार नहीं, बल्कि वर्षों के डर के बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बने भरोसे का प्रतीक भी रहा।
भीमबांध जंगल के अंदर बसे इन गांवों में कभी नक्सलियों का खौफ इस कदर था कि बाहरी लोगों का पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था। ग्रामीण मुख्यधारा से कटे हुए थे और प्रशासन से संपर्क करने में भी डरते थे। नक्सलियों के दबाव में ग्रामीणों को उनकी बात माननी पड़ती थी।
लेकिन समय के साथ हालात बदले। नक्सल समस्या कमजोर हुई और प्रशासन ने इन इलाकों में अपनी पहुंच बढ़ाई। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में करीब 25 वर्षों बाद इन गांवों के मतदान केंद्रों पर वोट पड़े। ग्रामीणों ने निर्भीक होकर लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लिया।
वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर गुरमाहा में पहली बार योग शिविर आयोजित हुआ। गांव में राशन वितरण शुरू हुआ और करीब 25 वर्षों बाद वहां तिरंगा फहराया गया। जिस मैदान में कभी नक्सली अपना झंडा लहराते थे, उसी जगह ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ राष्ट्रगान गाया और तिरंगे को सलामी दी।
अब रक्षाबंधन के मौके पर इन गांवों की महिलाओं का जिला मुख्यालय पहुंचना बदलाव की एक और बड़ी तस्वीर बन गया। महिलाओं ने डीएम-एसपी को राखी बांधकर प्रशासन के प्रति अपना विश्वास जताया।
जिलाधिकारी नवीन ने इसे भावुक क्षण बताते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं ने प्रशासन के प्रति भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि इन गांवों में जरूरी मूलभूत सुविधाएं जल्द बहाल की जाएंगी और प्रशासन ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
रक्षाबंधन पर बंधा यह रक्षा सूत्र अब सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि जमुई के इन गांवों में डर से विश्वास और अलगाव से विकास की ओर बढ़ते नए युग की शुरुआत का संदेश दे रहा है।





