धनबाद। जेएसएससी समेत राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में कथित तौर पर पाठ्यक्रम से बाहर सवाल पूछे जाने को लेकर अभ्यर्थियों में आक्रोश देखने को मिला। शनिवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं धनबाद के रणधीर वर्मा चौक स्थित धरना स्थल पर जुटे और परीक्षा आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में ऐसे सवाल शामिल किए गए, जिनका निर्धारित पाठ्यक्रम से कोई संबंध नहीं है। छात्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र में संस्कृत साहित्य से जुड़े प्रश्न पूछे गए, जिसे लेकर अभ्यर्थियों ने परीक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अभ्यर्थियों ने उदाहरण देते हुए ‘महुआ को संस्कृत में क्या कहते हैं?’ जैसे सवाल का हवाला दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संथाली विषय की परीक्षा में भाषा, साहित्य, लिपि, संस्कृति और निर्धारित सिलेबस से संबंधित प्रश्न पूछे जाने चाहिए, लेकिन कथित तौर पर दूसरे विषयों से जुड़े सवाल पूछे जाने से अभ्यर्थियों को परेशानी हुई।
प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता मनमोहन हेम्ब्रम ने कहा कि संथाली भाषा की परीक्षा में पाठ्यक्रम से हटकर प्रश्न पूछे जाना गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की लापरवाही का सीधा असर उन अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है, जो लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करते समय निर्धारित पाठ्यक्रम का पूरी तरह पालन होना चाहिए। अगर किसी विषय के पेपर में दूसरे विषयों से जुड़े या सिलेबस से बाहर के प्रश्न शामिल किए जाते हैं, तो यह अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार और संबंधित परीक्षा आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेने, प्रश्नपत्र की समीक्षा कराने और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की।
धनबाद में प्रदर्शन के बाद अब अभ्यर्थियों ने आंदोलन को राज्यस्तर पर ले जाने की चेतावनी दी है। छात्रों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी 2 सितंबर को रांची स्थित बापू वाटिका में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
संथाली प्रश्नपत्र को लेकर अभ्यर्थियों के इस विरोध प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर राज्य सरकार और परीक्षा आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।







