धनबाद जिले के कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद में 7 अगस्त को हुई भूधसान की घटना अब सियासी मुद्दा बनती जा रही है। हादसे के 13 दिन बाद भी प्रभावित परिवार मुआवजा, पुनर्वास और डेंजर जोन चिह्नित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वहीं, इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायक अनूप सिंह और धनबाद के भाजपा सांसद ढुलू महतो के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। दोनों पक्षों के समर्थक अब सोशल मीडिया पर रील और पोस्टर के जरिए भी एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं।
छाताबाद में हुए भूधसान में करीब 20 घर जमींदोज हो गए थे, जबकि एक दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। घटना के बाद आसपास के कई घर भी खतरे की जद में आ गए हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें अब भी अपने भविष्य और सुरक्षा की चिंता सता रही है।
भूधसान के बाद प्रभावित लोगों ने एसटीजी आउटसोर्सिंग परिसर में ‘आशियाना आंदोलन’ शुरू किया है। आंदोलनकारियों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए, सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास कराया जाए और पूरे इलाके में डेंजर जोन को चिह्नित कर सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए जाएं। त्रिपक्षीय वार्ता के बावजूद मांगों पर अब तक ठोस सहमति नहीं बन सकी है।
घटना के बाद कांग्रेस और झामुमो के कई नेता प्रभावितों से मिलने पहुंचे। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, बेरमो विधायक अनूप सिंह, मंत्री हफीजुल हसन और विधायक मथुरा महतो समेत कई नेताओं ने आंदोलन का समर्थन किया।
इधर, कांग्रेस विधायक अनूप सिंह ने भूधसान और क्षेत्र में कथित अवैध कोयला गतिविधियों को लेकर भाजपा सांसद ढुलू महतो पर गंभीर आरोप लगाए। उनका आरोप है कि अवैध गतिविधियों का असर अब भूधसान के रूप में सामने आ रहा है।
वहीं, सांसद ढुलू महतो ने आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए पलटवार किया और बेरमो क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन समेत अन्य मामलों की जांच सीबीआई, ईडी और केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की।
अब इस राजनीतिक टकराव की गूंज सोशल मीडिया तक पहुंच गई है। समर्थकों के बीच रील और पोस्टर वॉर चल रहा है। हालांकि, इस सियासी घमासान के बीच प्रभावित परिवारों की मांग साफ है—उन्हें राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि सुरक्षित आशियाना, मुआवजा और स्थायी पुनर्वास चाहिए।






