अररिया जिले के जोकीहाट निबंधन कार्यालय में 18 अगस्त से पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू कर दी गई है. लेकिन नई व्यवस्था शुरू होने के दो दिन बाद भी एक भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने की जानकारी सामने आई है. पेपरलेस व्यवस्था के विरोध में कातिब और मुंशी हड़ताल पर हैं, जबकि ग्रामीण भी पुरानी कागजी व्यवस्था बहाल करने की मांग कर रहे हैं.
दरअसल, नई व्यवस्था के तहत जमीन की रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जा रही है. इसमें ओटीपी, फिंगरप्रिंट, डिजिटल सिग्नेचर और ऑनलाइन दस्तावेज जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव-देहात से आने वाले कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए इस प्रक्रिया को समझना मुश्किल हो रहा है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जमीन बेहद महत्वपूर्ण संपत्ति है, इसलिए रजिस्ट्री के बाद लोगों के पास भौतिक दस्तावेज भी होना चाहिए. उनका सवाल है कि अगर भविष्य में मोबाइल खराब हो जाए, सिम बदल जाए या डिजिटल लिंक और पीडीएफ उपलब्ध न रहे, तो जमीन का प्रमाण कैसे मिलेगा.
मुंशी मो. रहमान का कहना है कि सरकार की व्यवस्था के अनुसार काम करना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़े सवालों का समाधान भी जरूरी है. वहीं आशिक इलाही ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग अंग्रेजी और डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. ओटीपी और ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर साइबर अपराध का डर भी लोगों के बीच बना हुआ है.
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है. जो लोग कार्यालय पहुंच रहे हैं, उनमें से कई डिजिटल प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जोकीहाट में जमीन की रजिस्ट्री दोबारा कब शुरू होगी. प्रदर्शनकारी पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग पर कायम हैं. वहीं लोगों की मांग है कि डिजिटल रिकॉर्ड के साथ फिजिकल प्रमाण उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाए, ताकि जमीन के दस्तावेज को लेकर भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो.





