पटना से बड़ी खबर सामने आई है, जहां बिहार के तकनीकी शिक्षा विभाग ने राज्य में रोजगार और शिक्षा को लेकर अहम आंकड़े साझा किए हैं। विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह के अनुसार, इस वर्ष राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों से 4,745 और पॉलिटेक्निक कॉलेजों से 10,501 छात्रों का कैंपस प्लेसमेंट हुआ है। इस तरह कुल 15,246 छात्रों को रोजगार मिला है। प्लेसमेंट के लिए सिस्को, एचसीएल, विप्रो, एलएंडटी और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियां बिहार के तकनीकी संस्थानों में पहुंच रही हैं।
लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार को लेकर पहले जो नकारात्मक धारणा थी, वह अब बदल रही है। राज्य के हर इंजीनियरिंग कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है और शिक्षकों को आईआईटी में प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इनोवेशन के क्षेत्र में भी बिहार के छात्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार ने फीस बेहद कम रखी है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन फीस मात्र 10 रुपये और मासिक फीस भी 10 रुपये है। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के लिए सालाना 2500 रुपये और 500 रुपये बीमा शुल्क लिया जाता है। हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का सालाना खर्च 1200 से 1500 रुपये के बीच होता है। वहीं पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एडमिशन फीस 5 रुपये और मासिक फीस भी 5 रुपये ही है।
सीटों की बात करें तो राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 14,553 सीटें हैं, जिनमें 81 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं। पॉलिटेक्निक में 17,243 सीटें हैं, जहां 93 प्रतिशत नामांकन होता है। काउंसलिंग में करीब 2 लाख छात्र शामिल होते हैं, लेकिन कुछ सीटें मनपसंद ब्रांच न मिलने के कारण खाली रह जाती हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने विभाग की सराहना करते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक आज हर क्षेत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि अब हर जिले में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेज खुल चुके हैं, जिससे छात्रों का पलायन कम हुआ है और वे राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
