बिहार के वैशाली जिले से पुलिस की कथित बर्बरता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पुलिस कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राघोपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हाजीपुर स्थित एससी/एसटी विशेष न्यायालय में परिवाद दायर किया गया है। आरोप है कि पुलिस ने एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि जातिसूचक गालियां दीं, उनकी मूंछ उखाड़ने की कोशिश की और अवैध वसूली के बाद उन्हें रिहा किया।

 

मामला राघोपुर थाना क्षेत्र का है, जहां परिवादी मेथुर भगत के पुत्र सुबोध भगत की पत्नी और पड़ोसी मनु भगत के बीच मामूली घरेलू विवाद हुआ था। बताया गया कि घटना के समय मेथुर भगत घर पर मौजूद नहीं थे। जब वे लौटे, तो उन्होंने दोनों पक्षों को समझाने और मामला शांत कराने की कोशिश की। इसी बीच उनके पुत्र सुबोध ने राघोपुर थाना को घटना की सूचना दे दी।

 

आरोप है कि सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अवधेश कुमार, मो. परवेज और चार-पांच अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद पीड़ित, उनके बेटे और बहू को जबरन पुलिस वाहन में बैठाकर थाने ले जाया गया।

 

परिवाद के अनुसार, थाने में पुलिस ने पीड़ित के बेटे को डरा-धमकाकर उसके ही पिता मेथुर भगत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवा दी, जिसका कांड संख्या 165/2026 बताया जा रहा है। जब मेथुर भगत ने इसे पारिवारिक मामला बताते हुए आपसी सहमति से सुलझाने की बात कही, तो थाना प्रभारी ने कथित तौर पर लाठी मंगवाकर उनकी बेरहमी से पिटाई करवाई।

 

पीड़ित का आरोप है कि उन्हें करीब 20 लाठियां मारी गईं, जातिसूचक गालियां दी गईं और अपमानित करने के लिए उनकी मूंछ उखाड़ने की भी कोशिश की गई। इतना ही नहीं, उन्हें लॉकअप में बंद कर 20 हजार रुपये की मांग की गई। बाद में उनकी पत्नी ने किसी तरह पैसे की व्यवस्था कर थाने पहुंची, जिसके बाद बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत जमानत देकर उन्हें छोड़ा गया।

 

अब न्याय की उम्मीद में मेथुर भगत ने एससी/एसटी विशेष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले में कोर्ट की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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