बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होते ही राज्य में कैबिनेट विस्तार का काउंटडाउन शुरू हो गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की दिल्ली में हुई मुलाकात को इस दिशा में अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों के नामों पर मंथन तेज हो गया है और जल्द ही अंतिम सूची तैयार की जा सकती है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को शपथ ली थी। उनके साथ विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। हालांकि सरकार बने दो हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद अब तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो सका है। इसकी बड़ी वजह बंगाल चुनाव में बीजेपी नेताओं की व्यस्तता बताई जा रही है।

अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद माना जा रहा है कि 4 से 10 मई के बीच कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ही अपने पुराने मंत्रियों को दोबारा मौका दे सकती हैं, वहीं कुछ नए चेहरों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। बीजेपी की ओर से मंगल पांडेय, विजय कुमार सिन्हा और दिलीप जायसवाल जैसे नाम चर्चा में हैं, जबकि जेडीयू से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी और मदन सहनी जैसे नेताओं के फिर से मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही है।

गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों में बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। चिराग पासवान की पार्टी अपने मौजूदा मंत्रियों को बरकरार रख सकती है, जबकि ‘हम’ और अन्य दलों को भी पहले की तरह प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।

बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, जिसके अनुसार अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। फिलहाल मंत्रिमंडल में सिर्फ तीन सदस्य हैं, ऐसे में 33 नए मंत्रियों की नियुक्ति होनी बाकी है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में जातीय और सामाजिक संतुलन के साथ-साथ युवा और महिला प्रतिनिधित्व पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इधर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी पर सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नए मंत्रिमंडल में किन चेहरों को जगह मिलती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *