पटना में सियासी तापमान उस वक्त और बढ़ गया, जब तेजस्वी यादव के एक बयान पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी “नफरत फैलाने वाली और समाज को बांटने वाली पार्टी” है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अनेकताओं में एकता का देश है, जहां भाषा, पहनावा, खानपान और संस्कृति अलग होने के बावजूद लोग एकजुट रहते हैं—यही देश की असली खूबसूरती है।
तेजस्वी यादव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वहां बीजेपी की स्थिति कमजोर है और ममता बनर्जी एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगी। साथ ही उन्होंने 2029 के आम चुनावों में केंद्र से बीजेपी सरकार को हटाने की बात कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वे “सबसे बड़े कलाकार” हैं, जो चुनाव के समय स्थानीय मुद्दों और व्यंजनों को लेकर राजनीति करते हैं।
इस बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पसवान ने पलटवार करते हुए कहा कि भारत की विविधता ही उसकी ताकत है और प्रधानमंत्री मोदी हर राज्य की भाषा, संस्कृति और खानपान को सम्मान देने का काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग देश को जाति, धर्म और भाषा के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं, वे इस भावना को नहीं समझ सकते। चिराग ने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में एनडीए गठबंधन को सफलता मिलेगी।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय saravagi ने भी तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तेजस्वी को बिहार की राजनीति पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि राज्य की जनता ने उन्हें पहले ही सीमित कर दिया है। सरावगी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में जनता बदलाव चाहती है और वहां भाजपा की सरकार बनने की संभावना मजबूत है।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार और बंगाल की राजनीति में बयानबाज़ी को और तीखा कर दिया है।
