बिहार में लागू शराबबंदी नीति के दस साल पूरे होने पर सरकार ने अपनी उपलब्धियों का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस महत्वाकांक्षी योजना को राज्य सरकार सख्ती और तकनीक के दम पर आगे बढ़ा रही है। मद्य निषेध, उत्पाद और निबंधन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 से 31 मार्च 2026 तक शराबबंदी कानून के तहत कुल 11,37,731 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 5,60,639 मामले मद्यनिषेध विभाग और 5,77,092 मामले पुलिस द्वारा दर्ज किए गए। इस दौरान 17,18,058 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
उपमुख्यमंत्री सह मंत्री bijendra प्रसाद यादव ने कहा कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए सरकार पूरी सख्ती बरत रही है। राज्यभर में 84 चेकपोस्ट बनाए गए हैं और निगरानी के लिए ड्रोन, स्निफर डॉग और स्कैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दस वर्षों में 4.83 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है।
सरकार ने शराब के विकल्प के रूप में ‘नीरा संवर्धन योजना’ को भी बढ़ावा दिया है, जिससे रोजगार सृजन के साथ शराबबंदी को मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग के सचिव अजय यादव ने बताया कि राजस्व, तकनीक और सख्ती—इन तीन मोर्चों पर सुधार किया गया है और अगले वित्तीय वर्ष के लिए 10,000 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य तय किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में निबंधन विभाग ने 8403 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया, जो तय लक्ष्य से अधिक (101.86%) है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9.8% की वृद्धि दर्शाता है।
सरकार का दावा है कि डिजिटाइजेशन से बड़ी सफलता मिली है। 1995 से 2026 तक 2.34 करोड़ दस्तावेजों को डिजिटल किया जा चुका है। साथ ही निबंधन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पेपरलेस सिस्टम, ऑनलाइन भुगतान और रियल-टाइम ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। आम लोगों के लिए हेल्प डेस्क, वातानुकूलित प्रतीक्षालय और दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
