बिहार सरकार राजधानी समेत राज्य के 11 शहरों के आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह टाउनशिप पूरी तरह प्लानिंग के तहत तैयार किए जाएंगे, जहां रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की सुविधाएं विकसित होंगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ शहरी विस्तार नहीं, बल्कि आर्थिक ढांचे में बदलाव लाना भी है। टाउनशिप के जरिए सेकेंडरी और टर्शियरी सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि होगी।

किसानों को नहीं होगा नुकसान
विनय कुमार ने कहा कि इस मॉडल में किसानों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। लैंड पुलिंग के तहत किसानों से ली गई जमीन को डेवलप करने के बाद 55% हिस्सा उन्हें वापस कर दिया जाएगा। इससे कोई भी किसान भूमिहीन नहीं होगा। साथ ही, पारंपरिक भूमि अधिग्रहण के मुकाबले किसानों को उनकी जमीन का चार गुना तक मुआवजा भी मिलेगा।

लैंड पुलिंग मॉडल से होगा विकास
सरकार इस परियोजना को लैंड पुलिंग मॉडल के जरिए लागू करेगी। इसके तहत पहले टाउनशिप प्लानिंग स्कीम का प्रारूप जारी किया जाएगा और अक्टूबर तक इसे लॉन्च करने की तैयारी है। हर प्लॉट को सड़क, बिजली, सीवरेज और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, जिससे अव्यवस्थित शहरीकरण की समस्या खत्म हो सके।

10,000 एकड़ जमीन चिन्हित
प्रधान सचिव ने बताया कि 11 सैटेलाइट टाउनशिप के लिए लगभग 10,000 एकड़ जमीन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें सीमित गांवों को शामिल किया गया है, ताकि बड़े पैमाने पर विस्थापन से बचा जा सके।

सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए और एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान के तहत आधुनिक, संगठित और आर्थिक रूप से मजबूत शहर विकसित किए जाएं।

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