पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संभावित विलय को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। इसी बीच प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी नई टीम को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। एनडीए के सहयोगी दल मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी के लिए प्रयास कर रहे हैं। खासतौर पर उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर सक्रिय हैं। चर्चा है कि उन्हें विधान परिषद भेजने की तैयारी चल रही है, जिससे उनके मंत्री बनने का रास्ता साफ हो सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने पहले ही कुशवाहा समाज से आने वाले नेता को मुख्यमंत्री बनाकर इस वोट बैंक को साधने की कोशिश की है। ऐसे में पार्टी अब RLM के विलय के जरिए कुशवाहा राजनीति पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद सीट देने का फैसला विलय के फार्मूले से जुड़ा हो सकता है।
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164 के तहत मंत्री बनने के लिए किसी भी व्यक्ति को 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। इसी वजह से दीपक प्रकाश को परिषद भेजने की कवायद तेज हुई है।
उधर, बीजेपी ने पहले ही उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजकर उन्हें राजनीतिक महत्व दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या उनके बेटे को भी पार्टी मौका देती है या नहीं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
30 अप्रैल नामांकन की अंतिम तारीख से पहले स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह तय होगा कि RLM का BJP में विलय होता है या नहीं, और दीपक प्रकाश को राजनीतिक तौर पर कितना लाभ मिलता है।
