बिहार के कटिहार जिल से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सदर अस्पताल में एक एंबुलेंस के भीतर 7 कुपोषित बच्चों और उनके 10 परिजनों, यानी कुल 17 लोगों को एक साथ ठूंसकर लाया गया। हालत इतनी खराब थी कि एंबुलेंस में खड़े होने या ठीक से बैठने तक की जगह नहीं थी।
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत आजमनगर प्रखंड से इन बच्चों को जांच के लिए लाया जा रहा था। नियमों के अनुसार एक एंबुलेंस में अधिकतम दो बच्चों और उनके अभिभावकों को सुरक्षित तरीके से लाने का प्रावधान है, लेकिन यहां सभी नियमों को नजरअंदाज कर दिया गया।
इस दौरान बच्चों और महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बंद और संकरी जगह में सफर करने के कारण घुटन की स्थिति बनी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि कुपोषित बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कमजोर होती है, ऐसे में इस तरह की भीड़भाड़ उन्हें संक्रमण के गंभीर खतरे में डाल सकती है। लंबे समय तक तंग हालत में रहने से उनकी सेहत और बिगड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
जब इस मामले पर एंबुलेंस चालक और साथ मौजूद डॉक्टर शकील अहमद से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। उनका कहना था कि वे केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश का पालन कर रहे थे। डॉक्टर के अनुसार, एंबुलेंस की कमी के कारण सभी को एक साथ लाना पड़ा।
यह घटना सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक ओर सरकार कुपोषण खत्म करने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है और चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
