बिहार के सहरसा जिले में बुधवार को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के आवाहन पर जोरदार ‘धिक्कार मार्च’ निकाला गया। यह प्रदर्शन महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर महागठबंधन दलों के विरोध में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भाग लिया।
मार्च के दौरान खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी इसमें शामिल हुईं और अपने अधिकारों के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरे शहर में रैली के दौरान माहौल राजनीतिक नारों से गूंजता रहा।
पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर पूरी तरह विफल रही है। उनका कहना था कि महिला आरक्षण बिल और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर महागठबंधन की नीतियां स्पष्ट नहीं हैं, जिससे इन विषयों पर ठोस निर्णय नहीं हो पा रहा है।
नेताओं ने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए ठोस नीतिगत निर्णय आवश्यक हैं। उन्होंने दावा किया कि महागठबंधन द्वारा इन मुद्दों का विरोध किया गया, जिसके कारण महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण बिल को आगे बढ़ाने में बाधाएं उत्पन्न हुईं।
‘धिक्कार मार्च’ के माध्यम से पार्टी ने न सिर्फ विरोध दर्ज कराया, बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और आम जनता को इन मुद्दों पर सोचने के लिए प्रेरित करने का भी प्रयास किया। नेताओं ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा इन मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक अपना संघर्ष जारी रखेगा।
इस मौके पर चंदन वागची, सी.एम. झा और जीशु सिंह सहित कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन इसने सियासी माहौल को जरूर गरमा दिया है।
