नालंदा जिले के बिहार शरीफ में एक प्रेरणादायक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां कभी स्लम एरिया के बच्चे कूड़े के ढेर और नशे की लत में फंसे रहते थे, आज वही बच्चे किताबें थामकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस परिवर्तन के पीछे तीन युवाओं—आशुतोष कुमार, विवेक कुमार और अमन राज—की निस्वार्थ मेहनत है।
इस सामाजिक मुहिम की शुरुआत 1 जनवरी 2019 को हुई थी। इंग्लिश ऑनर्स में पीजी कर चुके आशुतोष कुमार ने बताया कि शराबबंदी के बाद कई स्लम क्षेत्रों में बच्चे डेंड्राइट और व्हाइटनर जैसे नशे के शिकार हो रहे थे। उन्होंने समस्या की जड़ को समझते हुए शिक्षा को ही समाधान माना और बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया।
आशुतोष ने अपने दोस्तों विवेक और अमन के साथ मिलकर स्लम एरिया में मुफ्त शिक्षा अभियान शुरू किया। आज उनकी टीम में 25 सक्रिय सदस्य हैं, जो अलग-अलग बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं। अब तक इस पहल से 500 से अधिक बच्चों का सरकारी और निजी स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है।
ये युवा अपनी जेब खर्च से बच्चों के लिए कॉपी, किताबें और पेन जैसी जरूरी चीजें उपलब्ध कराते हैं। वे अपना समय भी इन बच्चों के साथ बिताते हैं, जिससे बच्चों में सकारात्मक बदलाव आया है। पहले जो बच्चे नशे की गिरफ्त में थे, अब वे नियमित स्कूल जा रहे हैं और पढ़ाई में रुचि दिखा रहे हैं।
बस्ती की अभिभावक सोना देवी बताती हैं कि इस पहल से बच्चों में गजब का सुधार हुआ है। वहीं, बच्चे भी अब बड़े सपने देख रहे हैं—कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई पुलिस अधिकारी, तो कोई आईएएस।
विवेक कुमार कहते हैं कि अपनी बेहतर जिंदगी देखकर उन्हें लगा कि इन बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए। वहीं, अमन राज ने भी देश सेवा का सपना समाज सेवा के जरिए पूरा करने का निर्णय लिया।
तीनों युवाओं की यह पहल न सिर्फ सैकड़ों बच्चों का भविष्य संवार रही है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल भी बन चुकी है।
