पटना: समस्तीपुर के सरायरंजन स्थित केदार संत रामाश्रय कॉलेज यानी KSR कॉलेज को पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की जद से बचाने की मांग अब राजधानी पटना तक पहुंच गई है। मंगलवार को सरायरंजन से सैकड़ों ग्रामीण पदयात्रा करते हुए पटना पहुंचे। इसमें बुजुर्ग महिलाओं से लेकर युवाओं तक बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
पटना पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने विधानसभा से लोकभवन की ओर मार्च शुरू किया, लेकिन सचिवालय के पास कृष्ण बल्लभ सहाय गोलंबर पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए ले जाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि KSR कॉलेज वर्ष 1981 से इलाके में शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए कॉलेज को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि एक्सप्रेसवे का रूट इस तरह तय किया जाए, जिससे कॉलेज का अस्तित्व सुरक्षित रहे।
आंदोलनकारी नीलकमल यादव ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे के लिए पहले तैयार किए गए नक्शे में कॉलेज को बचाने की गुंजाइश थी, लेकिन बाद में रूट में बदलाव किया गया। उनका दावा है कि एक बड़े राजनेता के रिश्तेदारों की करीब 12 बीघा जमीन को बचाने के लिए मार्ग बदला गया, जिसके कारण कॉलेज एक्सप्रेसवे की जद में आ गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी कुणाल कुमार ने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा और क्षेत्र की विरासत को बचाने के लिए है। उन्होंने मांग की कि NHAI के पुराने और नए नक्शे की जांच कर रूट में बदलाव के कारणों को सार्वजनिक किया जाए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद निजी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो पटना में आमरण अनशन और जंतर-मंतर तक आंदोलन किया जाएगा।





