बिहार के मुजफ्फरपुर के इस्लामपुर लहठी बाजार, जो कभी रात में भी गुलजार रहता था, आज दिन में भी सन्नाटे में डूबा नजर आ रहा है। करीब 90 साल पुराना यह बाजार देश के सबसे बड़े लाख की चूड़ी (लहठी) हब के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस समय इसकी रौनक फीकी पड़ गई है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा ईरान इजरायल तनाव बताया जा रहा है।

इस बाजार में 250 से अधिक दुकानें हैं, जहां पारंपरिक से लेकर आधुनिक ‘चार्जिंग लहठी’ तक की विविध रेंज मिलती है। लाख से बनी इन चूड़ियों की चमक, मजबूती और डिजाइन इन्हें खास बनाते हैं। हर साल शादी-ब्याह के मौसम में यहां करोड़ों का कारोबार होता है, लेकिन इस बार ग्राहकों की कमी साफ दिख रही है।

व्यापारियों का कहना है कि कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित होने से स्थिति बिगड़ी है। इम्पोर्टेड स्टोन, ग्लिटर, पॉलिशिंग केमिकल जैसे जरूरी सामान मुख्यतः जैसे ट्रेड हब के जरिए भारत आते हैं। मौजूदा तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे इन सामग्रियों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है। दुकानदार मोहम्मद मुबारक के अनुसार, “सामान समय पर नहीं पहुंच रहा, जिससे बाजार में कमी और महंगाई दोनों बढ़ी हैं।”

लहठी बनाना एक पारंपरिक और मेहनत भरा काम है, जो पूरी तरह कारीगरों के हुनर पर निर्भर करता है। सबसे पहले प्राकृतिक लाख को साफ कर गर्म किया जाता है, जिससे वह लचीला बनता है। फिर उसमें रंग मिलाकर लोहे की छड़ पर चढ़ाकर चूड़ी का आकार दिया जाता है। इसके बाद सजावट का काम होता है, जिसमें स्टोन, मोती और ग्लिटर लगाए जाते हैं। अंत में पॉलिश कर चूड़ियों को चमकदार और टिकाऊ बनाया जाता है।

यह पूरी प्रक्रिया हाथों से होती है और इसे सीखने में वर्षों लगते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में काम की कमी से कारीगर और व्यापारी दोनों परेशान हैं। अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो यह पारंपरिक उद्योग और गहरे संकट में आ सकता है।

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