नालंदा जिले के रहुई प्रखंड स्थित सोनसिकरा प्राथमिक विद्यालय की स्थिति शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां कक्षा 1 से 5 तक के 82 बच्चे पिछले चार वर्षों से बिना स्कूल भवन के पढ़ने को मजबूर हैं। वर्तमान में पढ़ाई गांव के ही एक दालान में चल रही है, जहां एक ही कमरे में सभी कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं।

रीतेश कुमार, जो 5वीं कक्षा का छात्र है, डॉक्टर बनने का सपना देखता है। लेकिन जिस माहौल में वह पढ़ रहा है, वहां उसका सपना अधूरा रह जाने का डर साफ दिखता है। रिया और राहुल जैसे कई अन्य बच्चे भी इसी संघर्ष से गुजर रहे हैं। ये सभी मजदूर परिवारों से आते हैं, जिनके पास निजी स्कूलों का विकल्प नहीं है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2018-19 की बाढ़ में स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो गया था। तब से स्कूल कभी किसी निजी मकान तो कभी किसी दालान में चलता रहा। अब जिस दालान में पढ़ाई हो रही है, उसे भी खाली करने का आदेश मिल चुका है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर फिर संकट गहरा गया है।

स्कूल में न तो शौचालय है, न पीने के पानी की सुविधा और न ही बेंच-डेस्क। एक ब्लैकबोर्ड के सहारे पांच कक्षाओं को पढ़ाना शिक्षकों के लिए भी बड़ी चुनौती है। प्रधान शिक्षक चंद्रभूषण प्रसाद ने कई बार अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने विधायक, मंत्री और शिक्षा विभाग तक गुहार लगाई, लेकिन हालात जस के तस हैं। गांव के करीब 700 मतदाताओं के लिए यह एकमात्र प्राथमिक विद्यालय है, जबकि आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

शिक्षा पदाधिकारी ने जल्द भवन निर्माण का आश्वासन जरूर दिया है, लेकिन ग्रामीणों का भरोसा अब कमजोर पड़ चुका है। फिलहाल, इन बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे ही चल रही है।

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