गोपालगंज के बरहीमा मोड़ पर स्थित ‘वीआईपी पान दुकान’ इन दिनों अपने खास स्वाद और अनोखी पहचान के लिए चर्चा में है। पिछले 22 वर्षों से चल रही इस दुकान पर 20 रुपये से लेकर 250 रुपये तक के खास पान मिलते हैं। दुकानदार अमरजीत कुमार के मुताबिक, पान तैयार करने में 40 से 50 तरह की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। केसर, कस्तूरी, गोल्डन वर्क, गुलकंद, काजू-किशमिश, इलायची, मुलेठी और कई तरह की जड़ी-बूटियां इसके स्वाद को खास बनाती हैं।
यहां मीठा पान, फायर पान और गोल्डन पान समेत करीब छह तरह के पान उपलब्ध हैं। दुकान की लोकप्रियता ऐसी है कि गोपालगंज के अलावा सिवान, सारण, बेतिया, मोतिहारी और उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, कुशीनगर व देवरिया से भी लोग यहां पान खाने पहुंचते हैं। कई जगहों पर यहां से पान भेजे भी जाते हैं। शादी-विवाह जैसे आयोजनों के लिए दुकान को ऑर्डर भी मिलते हैं।
इस दुकान की कहानी सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि संघर्ष की मिसाल भी है। दुकान के संचालक नागेंद्र साह करीब तीन दशक पहले रोजी-रोटी की तलाश में असम के गुवाहाटी गए थे, जहां उन्होंने गुमटी में पान की दुकान शुरू की थी। वर्ष 2003 में बिहारियों के खिलाफ हुए विरोध और हिंसा के माहौल के कारण उन्हें वहां से वापस लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपने गांव बरहीमा में पान की दुकान शुरू की।
साल 2004 से दुकान को उनके बेटे अमरजीत कुमार संभाल रहे हैं। छोटी सी गुमटी से शुरू हुआ कारोबार धीरे-धीरे बढ़ता गया और आज यह दुकान इलाके की पहचान बन चुकी है। अमरजीत के मुताबिक, रोजाना करीब 10 से 15 हजार रुपये की आमदनी होती है और कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 36 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
ग्राहक डॉ. ललित शुक्ला भी यहां के पान के स्वाद की तारीफ करते हैं। उनका कहना है कि पान में इतनी सारी चीजें डाली जाती हैं कि सभी के नाम याद रखना मुश्किल है, लेकिन स्वाद बेहद खास है।
VIP पान दुकान आज साबित कर रही है कि मेहनत, हुनर और गुणवत्ता के दम पर छोटा कारोबार भी बड़ी पहचान बना सकता है।





