जमुई: बिहार के जमुई में मंगलवार का दिन न्याय के लिए बेहद अहम है. पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने सामूहिक सामूहिक दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए त्रिगुण को अंतिम सांस तक कठोर प्रतिभागियों की सजा दी। इसके साथ ही प्रत्येक बुनियादी ढांचे पर एक-एक लाख रुपये की कीमत भी तय की गई है।

सजा पाने वालों में मोहम्मद इमरान नीरव चांद, मोहम्मद आफताब शोधकर्ता और मोहम्मद सद्दाम शामिल हैं। कोर्ट ने दो महीने के स्पीडी ट्रायल पूरे कर 37 साल के विस्तृत फैसले में यह सजा सुनाई। समीक्षा के दौरान सरकारी पक्ष ने इस अपराध को “नारकीय” फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने अपनी दलील पेश की।

मामला 1 दिसंबर 2025 का है, जब जमुई के अलीगंज बाजार से 15 साल की उम्र की लड़की अचानक लापता हो गई थी। 24 दिसंबर को पुलिस ने उसका एक बंद कमरा बरामद कर लिया। कस्तूरी की स्थिति देखकर हर कोई सहर उठा। उसने बताया कि 23 दिन पहले ही उसे कास्ट में कास्ट कर दिया गया था।

क्राफ्ट के दावे के अनुसार, वह अलीगंज से महाराजा और आफताब के साथ एक होटल में बंधक बना लिया गया था। बाद में उसे तीसरा मूल निवासी सद्दाम को पुनः प्राप्त कर लिया गया।

यहां बेटी की तलाश में परेशान मां को एक अज्ञात कॉल आया, जिसमें नवजात ने बच्ची को फिर से जिंदा करने का खतरा पैदा कर दिया। सूचना ही पुलिस की ओर से आई और स्टॉक में रखे गए तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस मामले में शिक्षकों और शिक्षकों से शीघ्र नियुक्ति की मांग की गई। 17 जनवरी 2026 को आरोप पत्र दाखिल हुआ और जनवरी के अंत में गवाही शुरू हुई। फरवरी में हुई बहस के बाद 16 मार्च को कोर्ट ने तीन को दोषी ठहराया और 24 मार्च को सजा सुनाई।

कोर्ट ने बी क्रूज़ की धारा 137(2), 96 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 वी 17 के तहत सजा सुनाई, जिसमें अधिकतम मृत्युदंड और न्यूनतम 20 साल या कक्षा की सजा का प्रावधान है।

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