श्रावणी मेले के दौरान कच्ची कांवरिया पथ पर इन दिनों आस्था, संघर्ष और हौसले की कई तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। इसी बीच पटना के नौबतपुर से आए दिव्यांग कांवरिया मनोज कुमार लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। दोनों पैरों से दिव्यांग मनोज अपने हाथों और शरीर के सहारे धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं।
कच्चे और कठिन रास्ते पर मनोज को इस तरह आगे बढ़ते देखकर रास्ते से गुजर रहे कांवरियों की नजरें भी उन पर ठहर जा रही हैं। कई श्रद्धालु उनके जज्बे को देखकर उनकी हौसला अफजाई करते नजर आ रहे हैं। मनोज के लिए यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और अटूट संकल्प की भी कहानी है।
मनोज कुमार ने बताया कि जब वह महज तीन वर्ष के थे, तभी पोलियो की चपेट में आने के कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हो गए। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपने हौसले पर हावी नहीं होने दिया। उनका कहना है कि जीवन में मुश्किलें जरूर आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
मनोज पिछले दो वर्षों से लगातार बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं। इस बार भी उन्होंने बाबा के प्रति अपनी आस्था को आगे रखते हुए यात्रा शुरू की है। कच्ची कांवरिया पथ पर हाथों के सहारे धीरे-धीरे आगे बढ़ना आसान नहीं है, लेकिन मनोज का विश्वास उन्हें लगातार आगे बढ़ा रहा है।
मनोज कहते हैं कि बाबा भोलेनाथ के प्रति उनकी आस्था इतनी मजबूत है कि यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियां उन्हें बड़ी नहीं लगतीं। उनका लक्ष्य बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव का दर्शन और जलाभिषेक करना है।
मनोज को इस तरह कठिन रास्ते पर यात्रा करते देखकर दूसरे कांवरिया भी उनके जज्बे और भक्ति की सराहना कर रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि मनोज ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
मनोज के कदम भले ही धीमे हैं, लेकिन बाबा के दर्शन की चाहत उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत दे रही है। उनकी यह यात्रा श्रद्धा के साथ-साथ हौसले, संघर्ष और कभी हार न मानने की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।





