धनबाद: रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण के विरोध में धनबाद में रेलवे कर्मचारियों ने जोरदार आवाज बुलंद की। ईस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के बैनर तले रविवार को धनबाद रेलवे ऑडिटोरियम में विशाल जन कन्वेंशन का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी, यूनियन पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए।
कन्वेंशन में रेलवे कर्मचारियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण पर रोक लगाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि रेलवे देश की जीवनरेखा है और इसे मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। निजीकरण से रोजगार के अवसर प्रभावित होने के साथ यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई गई।
कार्यक्रम में पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। कर्मचारियों ने NPS और UPS के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की। यूनियन नेताओं का कहना था कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है।
इसके अलावा आठवें वेतन आयोग को लागू करने और सातवें वेतन आयोग के आधार पर बोनस देने की मांग भी की गई। कर्मचारियों ने कहा कि बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों को देखते हुए वेतन एवं भत्तों में उचित वृद्धि जरूरी है। उनका कहना था कि रेलवे कर्मचारी विषम परिस्थितियों में लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं, इसलिए उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कन्वेंशन में केंद्र सरकार के श्रम कानूनों में बदलाव का भी विरोध किया गया। यूनियन नेताओं ने लेबर कोड रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि नए श्रम प्रावधानों से कर्मचारियों के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
वक्ताओं ने कर्मचारियों से अपनी मांगों को लेकर एकजुट रहने का आह्वान किया। यूनियन की ओर से चेतावनी दी गई कि यदि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
जन कन्वेंशन के अंत में कर्मचारियों ने रेलवे के निजीकरण पर रोक, OPS बहाली, आठवें वेतन आयोग के क्रियान्वयन, सातवें वेतन आयोग के आधार पर बोनस और लेबर कोड रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।







